# बलिहार गौर सरकार, जेहि चाकर नंद कुमार।

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-shatak-2005:yugal-shatak-2005-kirtan-091
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Book: Yugal Shatak
Source edition: 17-hi-2005; SHA-256 65e97712a464ad9a811875abe92d7ad166ef58f82c9b675cf4d010c1c940a7f7
Source PDF pages: 189–191



<a id="line-1"></a>बलिहार गौर सरकार, जेहि चाकर नंद कुमार।  
<a id="line-2"></a>विधि हरि हर कर जयकार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥  
<a id="line-3"></a>आनँदघन कीर्तिकुमार, आनँदघन तन सुकुमार।  
<a id="line-4"></a>तनु दामिनि दुति अनुहार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥

<a id="line-5"></a>जेहि स्वागत कर रिझवार, लखि पुनि पुनि कह बलिहार।  
<a id="line-6"></a>पायो न पार श्रुति चार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥  
<a id="line-7"></a>जेहि सँग कोटिन ब्रज नार, सेवत नित भानुदुलार।  
<a id="line-8"></a>जेहि छवि पर छवि बलिहार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥  
<a id="line-9"></a>जेहि पग धर सिर रिझवार, रिझवत नित नंदकुमार।  
<a id="line-10"></a>बनि मनिहारिनि लिलिहार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥  
<a id="line-11"></a>धरि अगनित तनु रिझवार, नहिं पायो जाको पार।  
<a id="line-12"></a>जेहि डर-डर नंदकुमार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥  
<a id="line-13"></a>जेहि पग चापत रिझवार, धर मुकुट चरण सुकुमार।  
<a id="line-14"></a>जेहि आरति श्याम उतार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥  
<a id="line-15"></a>आगे चल भानुदुलार, उनके पाछे ब्रजनार।  
<a id="line-16"></a>उनके पाछे रिझवार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥  
<a id="line-17"></a>जेहि कृपा चहत रिझवार, लहि महल टहल बलिहार।  
<a id="line-18"></a>मुर्छित लखि छवि सुकुमार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥  
<a id="line-19"></a>जेहि तनु बह ब्रज रस धार, जेहि छाया पर रति वार।  
<a id="line-20"></a>जो प्रेम रूप रस सार, सोइ मम “कृपालु” सुकुमार॥

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-21"></a>भावार्थ—गौरवर्ण वाली श्रीराधा पर मैं बलिहार जाता हूँ।  
<a id="line-22"></a>श्रीकृष्ण इनकी दासता करते हैं। ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव जिसकी  
<a id="line-23"></a>सदैव ही जय जयकार करते हैं-वे ही वृषभानुदुलारी मेरी स्वामिनी  
<a id="line-24"></a>हैं। आनन्दघन स्वरूप कीर्ति कुमारी का सुकुमार शरीर भी  
<a id="line-25"></a>आनन्दघनमय ही है। इनके शरीर का वर्ण बिजली की चमक की  
<a id="line-26"></a>ही भाँति है। श्रीकृष्ण जिनका स्वागत करने को तत्पर रहते हैं।  
<a id="line-27"></a>जिन्हें देखकर वे बार-बार बलिहार जाते हैं चारों वेद जिनकी

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-28"></a>महिमा का अन्त नहीं जान सके, वे ही वृषभानुनन्दिनी मेरी स्वामिनी  
<a id="line-29"></a>हैं। जिनके साथ-साथ सदैव कोटि-कोटि ब्रजगोपियाँ रहती हैं। ये  
<a id="line-30"></a>निरन्तर इनकी सेवा में रत रहती हैं। जिसकी छवि पर छवि भी  
<a id="line-31"></a>बलिहार जाती है। वे ही श्रीराधा मेरी स्वामिनी हैं। जिनके चरणों  
<a id="line-32"></a>में श्रीकृष्ण भी अपना मस्तक रखते हैं श्रीकृष्ण निरन्तर जिन्हें रिझाते  
<a id="line-33"></a>रहते हैं। श्रीराधा को प्रसन्न करने हेतु श्रीहरि कभी तो मनिहारिनि  
<a id="line-34"></a>बनते हैं, कभी लिलिहारिनि। असंख्य रूप धारण कर भी श्रीकृष्ण  
<a id="line-35"></a>ने जिनकी लीला का अन्त नहीं पाया वे ही वृषभानुनन्दिनी मेरी  
<a id="line-36"></a>स्वामिनी हैं। जिसके भय से श्रीकृष्ण भी भयभीत होते हैं।  
<a id="line-37"></a>श्यामसुन्दर जिनके चरणों को दबाते रहते हैं। जिनके सुकुमार  
<a id="line-38"></a>चरणों में अपना मुकुट रखकर श्यामसुन्दर आरती उतारते हैं वे ही  
<a id="line-39"></a>श्रीराधा मेरी स्वामिनी हैं। आगे-आगे श्रीराधा चलती हैं, उनके पीछे  
<a id="line-40"></a>ब्रजगोपियाँ तत्पश्चात् श्रीकृष्ण चलते हैं, ऐसी वृषभानुनन्दिनी मेरी  
<a id="line-41"></a>स्वामिनी हैं। महलों में सेवा-रत रहकर श्रीकृष्ण जिनकी कृपा की  
<a id="line-42"></a>लालसा रखते हैं। जिनकी रूप माधुरी से आकर्षित मूर्च्छित श्रीकृष्ण  
<a id="line-43"></a>पृथ्वी पर गिर पड़ते हैं, वे ही श्रीराधा मेरी स्वामिनी हैं। जिनके शरीर  
<a id="line-44"></a>से निरन्तर ब्रजरस की धारा प्रवाहित होती रहती है। जिनके सुन्दर  
<a id="line-45"></a>शरीर की छाया पर ही रति को न्यौछावर किया जा सकता है जो  
<a id="line-46"></a>प्रेम रूप एवं रस की सार-स्वरूपा हैं। श्री कृपालुजी कहते हैं- वे  
<a id="line-47"></a>ही सुकुमारी राधा मेरी स्वामिनी हैं।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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Unofficial source transcription. Roman transliteration is not an English translation. No missing meanings are generated.
