# राधे राधे गोविन्द राधे, राधे राधे राधे।

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-shatak-2005:yugal-shatak-2005-kirtan-078
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Book: Yugal Shatak
Source edition: 17-hi-2005; SHA-256 65e97712a464ad9a811875abe92d7ad166ef58f82c9b675cf4d010c1c940a7f7
Source PDF pages: 160–170



<a id="line-1"></a>राधे राधे गोविन्द राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-2"></a>तुम भी नहिं भूलो मोहिं पल छिन आधे,  
<a id="line-3"></a>मैं भी न भूलूँ तोहिं राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-4"></a>तुम बिनु जिउँ नहिं इक छिन राधे,  
<a id="line-5"></a>ऐसी बना दे मोहिं राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-6"></a>भली हूँ बुरी हूँ जो हूँ तेरी ही हूँ राधे,  
<a id="line-7"></a>प्यार करो या मारो राधे, राधे राधे राधे।

<a id="line-8"></a>पतित जनन हित तोहिं तजि राधे,  
<a id="line-9"></a>और ठौर हो तो बता दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-10"></a>तू ही तो है मेरी गति मति रति राधे,  
<a id="line-11"></a>तेरे सिवा कोइ नहिं राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-12"></a>तेरे तो हैं अगनित भक्त जन राधे,  
<a id="line-13"></a>मेरी तो है इक तू ही राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-14"></a>खरे खरे को निभाते सब जग राधे,  
<a id="line-15"></a>मुझ खोटे को निभा दे राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-16"></a>भुक्ति मुक्ति बैकुण्ठ नहिं माँगूँ राधे,  
<a id="line-17"></a>ब्रज रस बूँद पिला दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-18"></a>मेरे उर पुर में ही रहे नित राधे,  
<a id="line-19"></a>उसका किराया चुका दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-20"></a>मुझ से पतित यदि होते नहिं राधे,  
<a id="line-21"></a>तेरे द्वार आता कौन राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-22"></a>गुरु ने जनाया मैंने जाना तोहिं राधे,  
<a id="line-23"></a>अब नहिं छोड़ूँ पाछा राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-24"></a>तुमको पतित-पावनि लखि राधे,  
<a id="line-25"></a>किये मनमाने पाप राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-26"></a>तेरी माया ने भुलाया विधि बुधि राधे,  
<a id="line-27"></a>मैं तो अति दीन हीन राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-28"></a>करि को उठाया, गिरि को उठाया राधे,  
<a id="line-29"></a>इनते भी क्या मैं भारी राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-30"></a>मेरा तन-मन-धन सब तेरा राधे,

<a id="line-31"></a>जब सब तेरा तोहिं का दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-32"></a>तेरे ऋण उऋण न होइ सक राधे,  
<a id="line-33"></a>अगनित जनमहुँ राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-34"></a>तुम बिनु हेतु सनेहिनि राधे,  
<a id="line-35"></a>साधन हेतु हटा दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-36"></a>तुझ सी न दाता कोउ दयामयी राधे,  
<a id="line-37"></a>मुझ सा भिखारी नहिं राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-38"></a>तेरे नाम में हैं तेरी शक्ति सब राधे,  
<a id="line-39"></a>अस विश्वास दिला दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-40"></a>तेरी कृपा बिनु तोहिं जाना कौन राधे,  
<a id="line-41"></a>एकहुँ नाम बता दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-42"></a>मैं तो भूला तेरी मायावश तोहिं राधे,  
<a id="line-43"></a>तूने क्यों भुलाया मोहिँ राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-44"></a>पूत तो कुपूत होय जग में भी राधे,  
<a id="line-45"></a>माता कुमाता न राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-46"></a>तेरा सुत द्वार द्वार माँगे भीख राधे,  
<a id="line-47"></a>तेरी भी लाज जाय राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-48"></a>तू तो व्यापक सब जग महँ राधे,  
<a id="line-49"></a>कहुँ टुक झलक दिखा दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-50"></a>तेरे मेरे बीच में बाधा माया राधे,  
<a id="line-51"></a>माया को आँखि दिखा दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-52"></a>मेरा पर्दा माया तेरा योगमाया राधे,  
<a id="line-53"></a>दोनों ही पर्दा हटा दे, राधे राधे राधे।

<a id="line-54"></a>मेरा सब कछु तेरा दिया हुआ राधे,  
<a id="line-55"></a>तु ही कहु हम तोहिं का दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-56"></a>यदि न बनाये मोहिं निज दासी राधे,  
<a id="line-57"></a>दासी की दासी बना दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-58"></a>महल टहल यदि न दे मोहिं राधे,  
<a id="line-59"></a>द्वार पहरुआ बना दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-60"></a>जनमहुँ पुनि पुनि तेरे ब्रज राधे,  
<a id="line-61"></a>करुँ नित राधे राधे राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-62"></a>तू तो ब्रजरस मूरति मेरी राधे,  
<a id="line-63"></a>मोहिं इक बूँद पिला दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-64"></a>जाके डर डरे डर सोउ डरे राधे,  
<a id="line-65"></a>ऐसी रक्षक मेरी राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-66"></a>माता के उदर मारे सुत पग राधे,  
<a id="line-67"></a>रोष न माँ उर राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-68"></a>जल बिनु मीन न रहि सक राधे,  
<a id="line-69"></a>ऐसे तुम बिनु हम राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-70"></a>जग शिशु माता के भरोसे रहे राधे,  
<a id="line-71"></a>हम हैं भरोसे तेरे राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-72"></a>जाके बल वाको पूछे सब जग राधे,  
<a id="line-73"></a>निर्बल की तू ही प्यारी राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-74"></a>तनु बिनु प्राण न रहि सक राधे,  
<a id="line-75"></a>ऐसे तुम बिनु हम राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-76"></a>मेरा मन तोसों छत्तिस जनु राधे,

<a id="line-77"></a>तिरसठ वाय बना दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-78"></a>मैं तो तेरा इक दुधमुख शिशु राधे,  
<a id="line-79"></a>अच्छा बुरा जानूँ नहिं राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-80"></a>तू ही मेरी थी है तू ही रहेगी भी राधे,  
<a id="line-81"></a>तेरा ही कहा हुआ है राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-82"></a>नव शिशु भी न जाने माँ को जग राधे,  
<a id="line-83"></a>कूड़ेदान फेंके नहिं राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-84"></a>तू ही मेरी मैं भी तेरी सदा ते ही राधे,  
<a id="line-85"></a>पुनि यह दूरी क्यों बता दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-86"></a>तुझमें मैं मुझमें तू नित रहे राधे,  
<a id="line-87"></a>पुनि दर्शन काहे ना दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-88"></a>आया बड़ी आशा लै के तेरे ब्रज राधे,  
<a id="line-89"></a>चिन्मय ब्रज दिखला दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-90"></a>मैं तो हठीला अति तव सुत राधे,  
<a id="line-91"></a>छोड़ू नहिं पाछा तेरा राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-92"></a>राधे राधे गाऊँ नित ध्याऊँ नित राधे,  
<a id="line-93"></a>पुनि चाहे नरक दिला दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-94"></a>माना तू कहेगी प्रेम मैं ना दऊँ राधे,  
<a id="line-95"></a>गोपी सों ही प्रेम दिला दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-96"></a>तेरी भौंह लखि डरे मायापति राधे,  
<a id="line-97"></a>माया को भी भौंह दिखा दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-98"></a>गुरु ने जनाया जाना तू ही मेरी राधे,  
<a id="line-99"></a>माना नहिं तू ही मनवा दे, राधे राधे राधे।

<a id="line-100"></a>अँगुठा पियत बीते युग युग राधे,  
<a id="line-101"></a>ब्रज रस अब तो पिला दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-102"></a>मिलन का सुख नहिं माँगूँ तोसों राधे,  
<a id="line-103"></a>उर विरहाग लगा दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-104"></a>यह वर माँगूँ वरदायिनि राधे,  
<a id="line-105"></a>माँगूँ नहिं कभु कछु राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-106"></a>ध्रुव जनु मैं भी तोहिं जानूँ नहिं राधे,  
<a id="line-107"></a>कर धरि शीश जना दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-108"></a>मोह निशा में सोया तेरा सुत राधे,  
<a id="line-109"></a>भूखा प्यासा अब तो जगा दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-110"></a>तोहिं तजि बैकुण्ठहुँ ना दे राधे,  
<a id="line-111"></a>तोहिँ सँग नरक दिला दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-112"></a>तू तो ब्रज रस अम्बुधि प्यारी राधे,  
<a id="line-113"></a>मोहुँ इक बूँद पिला दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-114"></a>ध्यावुँ नित युगल चरण तव राधे,  
<a id="line-115"></a>गाउँ नित राधे राधे राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-116"></a>तेरा सुख बनि जाय मेरा सुख राधे,  
<a id="line-117"></a>ऐसी मेरी सुमति बना दे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-118"></a>श्रुति कह तू ही मेरी आत्मा राधे,  
<a id="line-119"></a>तुम बिनु तन शव राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-120"></a>अगनित अधमन अपनाया राधे,  
<a id="line-121"></a>अपना “कृपालु” को भी राधे, राधे राधे राधे।

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-122"></a>भावार्थ—हे राधे! तुम मुझे आधे पल को भी न भुलाना।  
<a id="line-123"></a>ऐसी कृपा करो कि मैं भी कभी आधे क्षण को भी तुम्हें न भुलाऊँ।  
<a id="line-124"></a>हे राधे! तुमसे रहित होकर मैं क्षण भर भी जीवन धारण न करूँ,  
<a id="line-125"></a>मुझे ऐसी बना दो। मैं भली हूँ या बुरी जैसी भी हूँ, तुम्हारी ही हूँ  
<a id="line-126"></a>अब तुम मुझे प्यार करो, अथवा मारो। हे राधे! पतितों के लिये  
<a id="line-127"></a>तुम्हारे अतिरिक्त कोई अन्य स्थान नहीं है। तुम ही मेरी गति, बुद्धि  
<a id="line-128"></a>प्रदायिनी एवं श्रीकृष्ण प्रेम का वितरण करने वाली हो। तुम्हारे  
<a id="line-129"></a>अतिरिक्त मेरा और कोई भी नहीं है। हे राधे! तुम्हारे तो असंख्य  
<a id="line-130"></a>भक्त हैं परन्तु मुझे शरण देने वाली तो एकमात्र तुम ही हो। गुणवानों  
<a id="line-131"></a>को तो संसार में सभी आश्रय देते हैं परन्तु मेरे जैसे गुणहीन को तो  
<a id="line-132"></a>एकमात्र तुम ही निभानेवाली हो। मैं तुमसे ब्रह्मलोक पर्यन्त के  
<a id="line-133"></a>सुख भोग नहीं माँगता। बैकुण्ठ का सुख भी मुझे नहीं चाहिये।  
<a id="line-134"></a>यदि दे सको तो ब्रज-रस की एक बूँद का ही दान करो। तुम तो  
<a id="line-135"></a>सदा मेरे हृदय में ही निवास करती हो, मेरे हृदय रूपी घर का  
<a id="line-136"></a>किराया चुका दो। श्रीराधे! यदि मेरे जैसे पतित संसार में न होते तो  
<a id="line-137"></a>तुम्हारे द्वार पर भला कौन आता? गुरु द्वारा मुझे तुम्हारा ज्ञान प्राप्त  
<a id="line-138"></a>हुआ, अब मैं तुम्हारा पीछा नहीं छोडँ़ूगा। तुम्हें पतित- पावनी  
<a id="line-139"></a>देखकर ही मैंने मनमाने पाप किये हैं।  
<a id="line-140"></a>नाम पतित पावन सुनि, निर्भय ह्वै किये पाप।  
<a id="line-141"></a>यामें दोष बताउ मम, दोषी तो हैं आप॥  
<a id="line-142"></a>[भक्ति शतक]  
<a id="line-143"></a>तुम्हारी माया ने ब्रह्मा की बुद्धि को भी मोहित किया है फिर  
<a id="line-144"></a>मैं तो अत्यन्त ही दीन-हीन हूँ। तुमने हरि रूप धारण कर ग्राह से

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-145"></a>ग्रसित गजराज का उद्धार किया। श्रीकृष्ण रूप से गोवर्धन गिरि को  
<a id="line-146"></a>कनिष्ठिका पर धारण किया क्या मेरा भार इनसे भी अधिक है  
<a id="line-147"></a>जिसे तुम नहीं उठा सकोगी? मेरा तन, मन एवं धन सब तुम्हारा  
<a id="line-148"></a>ही है। जब सब कुछ तुम्हारा ही है तो फिर मैं तुम्हें क्या दूँ? मैं  
<a id="line-149"></a>कभी तुम्हारे ऋण से उऋण नहीं हो सकूँगा। असंख्य जन्म धारण  
<a id="line-150"></a>कर भी तुम्हारे उपकारों का बदला मैं नहीं चुका सकता। राधे! तुम  
<a id="line-151"></a>तो बिना कारण के ही प्रेम प्रदान करती हो फिर साधन का हेतु  
<a id="line-152"></a>क्यों बनाया? उसे समाप्त करो। हे दयामयी! तुम्हारी जैसी दानी  
<a id="line-153"></a>कोई नहीं है और मेरे जैसा भिखारी भी तुम्हें अन्य कोई नहीं मिलेगा।  
<a id="line-154"></a>“तुम्हारे नाम में तुम्हारी सम्पूर्ण शक्तियाँ हैं” मेरा यह विश्वास सदा  
<a id="line-155"></a>दृढ़ रहे। हे श्रीराधे! तुम्हारी कृपा के बिना भला तुम्हें कौन जान  
<a id="line-156"></a>सकता है? यदि किसी ने जाना है तो ऐसा एक भी नाम तुम मुझे  
<a id="line-157"></a>बताओ। राधे! मैं तो मायाधीन था; अतः तुम्हें भूल गया तो कोई  
<a id="line-158"></a>आश्चर्य नहीं है परन्तु तुम तो माया की स्वामिनी हो तुम मुझे क्यों  
<a id="line-159"></a>भूल गईं? राधे! पुत्र तो संसार में कुपुत्र होते हैं परन्तु माता तो  
<a id="line-160"></a>कुमाता नहीं होती। तुम्हारा पुत्र होकर मैं द्वार-द्वार भीख माँग रहा  
<a id="line-161"></a>हूँ। इससे तो तुम्हारा भी अपयश होगा। तुम तो सर्वत्र व्यापक हो;  
<a id="line-162"></a>किसी भी स्थान पर अपनी किंचित् झलक मुझे दिखा दो। तुम्हारे  
<a id="line-163"></a>और मेरे मध्य में तुम्हारी माया ही बाधा है। इस माया को नेत्रों के  
<a id="line-164"></a>संकेत से मेरे निकट से भगा दो। मेरे अन्तः करण पर माया का पर्दा  
<a id="line-165"></a>पड़ा है। तुम्हारे पास योगमाया है।  
<a id="line-166"></a>नाहं प्रकाशः सर्वस्य योगमाया समावृतः।  
<a id="line-167"></a>[गीता]

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-168"></a>इन दोनों ही आवरणों को हटाकर मुझे अपना साक्षात्कार  
<a id="line-169"></a>कराओ। राधे! मेरे पास जो कुछ भी है सब तुम्हारा ही दिया हुआ  
<a id="line-170"></a>है। भला मैं तुम्हें क्या दे सकता हूँ? यदि तुम मुझे अपना दासत्व  
<a id="line-171"></a>प्रदान नहीं कर सकती हो तो अपनी दासी की दासी बना दो। यदि  
<a id="line-172"></a>तुम मुझे अपने महल की सेवा न दे सको तो द्वार का प्रहरी ही  
<a id="line-173"></a>बना लो। तुम्हारे ब्रज में बार-बार जन्म लेकर मैं निरन्तर राधे राधे  
<a id="line-174"></a>करूँ। तुम तो ब्रजरस की साकार प्रतिमा ही हो, मुझे भी एक बूँद  
<a id="line-175"></a>पिला दो। जिस ब्रह्म के डर से डर भी डरता है वह श्रीराधा के  
<a id="line-176"></a>भय से भयभीत रहता है, श्री राधा मेरी रक्षा करने वाली हैं। गर्भस्थ  
<a id="line-177"></a>शिशु माँ के उदर में पैर मारता है, ऐसी माँ इस को अपराध मानकर  
<a id="line-178"></a>क्रोध नहीं करती। जिस प्रकार जल के बिना मछली जीवित नहीं  
<a id="line-179"></a>रह सकती, इसी प्रकार से हम भी तुम्हारे बिना जीवन धारण नहीं  
<a id="line-180"></a>कर सकेंगे। बलवान को संसार में सभी पूछते हैं, मुझ जैसी निर्बल  
<a id="line-181"></a>की तो एकमात्र तुम ही हो।  
<a id="line-182"></a>सब साधन सम्पन्न कहँ, पूछत सब संसार।  
<a id="line-183"></a>साधन हीन प्रपन्न कहँ, पूछत नन्दकुमार॥  
<a id="line-184"></a>[भक्ति-शतक]  
<a id="line-185"></a>राधे! बिना प्राण के शरीर नहीं रहता है, इसी प्रकार से हम भी  
<a id="line-186"></a>तुम्हारे बिना जीवित नहीं रह सकेंगे। हे राधे! मेरा मन तुमसे विमुख  
<a id="line-187"></a>होकर छत्तीस के अंक की भाँति हो गया है, इसे अपनी अनुकूलता  
<a id="line-188"></a>प्रदान कर तिरसठ के अंक की भाँति बना लो। मैं तुम्हारा नवजात  
<a id="line-189"></a>अबोध शिशु हूँ। अच्छा बुरा कुछ भी नहीं जानता। तुम ही मेरी  
<a id="line-190"></a>थी, हो एवं सदा रहोगी। ऐसा वेद में तुमने ही कहा है। संसार में

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-191"></a>तुरन्त का पैदा हुआ बच्चा माँ को नहीं जानता है। किंतु माँ क्या  
<a id="line-192"></a>बच्चे को कूड़ेदान में फेंक देती है? राधे! एकमात्र तुम ही मेरी हो।  
<a id="line-193"></a>मैं भी सदा से तुम्हारी ही हूँ। फिर मेरे और तुम्हारे बीच में यह दूरी  
<a id="line-194"></a>क्यों है? मैं सदा तुममें रहता हूँ एवं तुम सदा मुझमें रहती हो, फिर  
<a id="line-195"></a>मुझे तुम्हारा दर्शन क्यों नहीं होता? हे राधे! मैं तुम्हारे ब्रज में बड़ी  
<a id="line-196"></a>आशा से आया हूँ, तुम मुझे अपने दिव्य ब्रजधाम के दर्शन कराओ।  
<a id="line-197"></a>मैं तुम्हारा अत्यन्त हठीला पुत्र हूँ, तुम्हारा पीछा नहीं छोडँ़ूगा। सदा  
<a id="line-198"></a>राधे राधे नाम को गाऊँ, सदा तुम्हारा ध्यान करूँ फिर चाहे मुझे  
<a id="line-199"></a>नरक में ही क्यों न जाना पड़े। यदि तुम यह कहती हो कि मुझे  
<a id="line-200"></a>अपना प्रेम नहीं दोगी तो अपनी किसी गोपी से दिलवा दो। राधे!  
<a id="line-201"></a>तुम्हारी भृकुटि को देखकर तो मायापति भी भयभीत होते हैं, फिर  
<a id="line-202"></a>इस माया का क्या साहस है जो मेरा कुछ बिगाड़ सके। एक बार  
<a id="line-203"></a>इसे टेढ़ी भृकुटि करके डरा दो।  
<a id="line-204"></a>गुरु द्वारा मुझे यह ज्ञान दिया गया कि तुम ही मेरी हो परन्तु मैंने  
<a id="line-205"></a>कभी इस सत्य को दृढ़तापूर्वक माना नहीं अब तुम ही मनवा दो।  
<a id="line-206"></a>मुझे अँगूठा पीते पीते ही (सांसारिक मिथ्या सुख भोग करते हुए)  
<a id="line-207"></a>युग पर युग व्यतीत हो गये। अब तो ब्रजरस पिला दो। मैं तुमसे  
<a id="line-208"></a>तुम्हारा मिलन नहीं चाहता मेरे हृदय में तो विरह की अग्नि ही  
<a id="line-209"></a>प्रज्ज्वलित कर दो। हे वरदायिनी! मैं तुमसे यही वर माँगता हूँ कि  
<a id="line-210"></a>मुझे तुमसे कभी कुछ माँगना न पड़े। ध्रुव की भाँति मैं भी तुम्हें नहीं  
<a id="line-211"></a>जानता (पाँच वर्ष का बालक)ध्रुव भगवान् की स्तुति करना नहीं  
<a id="line-212"></a>जानता था। श्रीहरि ने अपना शंख छुआकर उसकी वाणी को प्रस्फुटित  
<a id="line-213"></a>कर दिया। तुम भी अपना कर-कमल मेरे सिर पर रखकर अपना

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-214"></a>ज्ञान प्रदान करो। हे राधे! तुम्हारा पुत्र अज्ञान की महा अन्धकारमयी  
<a id="line-215"></a>रात्रि में सोया हुआ है, मैं तुम्हारे प्रेम का ही भूखा हूँ। मुझे अपना  
<a id="line-216"></a>ज्ञान प्रदान करो। अपना वियोग देकर तुम यदि मुझे बैकुण्ठ भी प्रदान  
<a id="line-217"></a>करो तो मुझे नहीं चाहिये। तुम्हारे साथ यदि नरक में भी मुझे रहना  
<a id="line-218"></a>पड़े तो स्वीकार है। हे राधे! तुम तो ब्रजरस की अम्बुधि ही हो मुझे  
<a id="line-219"></a>भी एक बूँद ब्रजरस पिला दो। मैं निरन्तर तुम्हारे युगल चरणों का  
<a id="line-220"></a>ही ध्यान करूँ एवं राधे राधे नाम का गायन करूँ। हे राधे! मुझे ऐसी  
<a id="line-221"></a>श्रेष्ठ बुद्धि प्रदान करो जिससे तुम्हारा सुख ही मेरा सुख बन जाय।  
<a id="line-222"></a>वेद कहता है-तुम ही मेरी आत्मा हो, आत्मा के बिना तो शरीर शव  
<a id="line-223"></a>के समान ही होता है। अतः तुमसे रहित होकर मैं मृतक के समान  
<a id="line-224"></a>ही हूँ। हे “कृपालु”! तुमने असंख्य अधम जीवों को अपनी शरणागति  
<a id="line-225"></a>प्रदान की है, मुझे भी अब अपना बना लो।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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