# राधे राधे राधे राधे राधे राधे

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-shatak-2005:yugal-shatak-2005-kirtan-077
Canonical page: https://radhey.shreyam1008.com.np/read/yugal-shatak-2005/yugal-shatak-2005-kirtan-077/
Book: Yugal Shatak
Source edition: 17-hi-2005; SHA-256 65e97712a464ad9a811875abe92d7ad166ef58f82c9b675cf4d010c1c940a7f7
Source PDF pages: 158–160



<a id="line-1"></a>राधे राधे राधे राधे राधे राधे  
<a id="line-2"></a>राधे राधे राधे राधे राधे राधे  
<a id="line-3"></a>भुक्ति मुक्ति ना दे राधे प्रेम सुधा दे।  
<a id="line-4"></a>निज दासी दासी दासी दासी बना दे।  
<a id="line-5"></a>राधे निज महल की टहल दिला दे।  
<a id="line-6"></a>ब्रज रस की इक बूँद पिला दे।  
<a id="line-7"></a>काउ गोपी ते गोपी प्रेम दिला दे।  
<a id="line-8"></a>तेरा नाम लै के रोऊँ ऐसी बना दे।  
<a id="line-9"></a>तेरा गुन गाऊँ नित ऐसी बना दे।  
<a id="line-10"></a>तेरी छवि ध्याऊँ नित ऐसी बना दे।  
<a id="line-11"></a>निज रुचि महँ रुचि मेरी बना दे।  
<a id="line-12"></a>जित देखूँ तू ही दीखे ऐसी बना दे।  
<a id="line-13"></a>तेरे बिनु जीऊँ नहिं ऐसी बना दे।  
<a id="line-14"></a>बरसाने वारी भोरी भारी प्यारी राधे।  
<a id="line-15"></a>श्री वृषभानुदुलारी प्यारी राधे।  
<a id="line-16"></a>भली हूँ बुरी हूँ जो हूँ तेरी ही हूँ राधे।  
<a id="line-17"></a>नथ बेसर वारी प्यारी राधे।  
<a id="line-18"></a>ऊँचे महल अटा वारी राधे।  
<a id="line-19"></a>तू ही इक मेरी थी है रहेगी भी राधे।  
<a id="line-20"></a>मैं ना भूलूँ तोहिं तू ना भूल मोहिं राधे।  
<a id="line-21"></a>माना मैं बुरी हूँ अति हूँ तो तेरी राधे।

<a id="line-22"></a>मेरी तो है तू ही गति मति रति राधे।  
<a id="line-23"></a>पतितन और ठौर हो तो बता दे।  
<a id="line-24"></a>होत कुपूत पूत जग राधे।  
<a id="line-25"></a>माता भी कुमाता कोउ भइ हो बता दे।  
<a id="line-26"></a>रसिक रँगीली गुन गर्वीली राधे।  
<a id="line-27"></a>ब्रज रस बरसाने वारी प्यारी राधे।  
<a id="line-28"></a>तेरे सब खरे-खरे सेवक राधे।  
<a id="line-29"></a>मुझ खोटी को खरों के संग चला दे।  
<a id="line-30"></a>अच्छों की तो पूजा होय बुरों ते ही राधे।  
<a id="line-31"></a>कोउ हो “कृपालु” मोसों बुरा तो बता दे।

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-32"></a>भावार्थ—हे श्री राधे! मैं आपसे ब्रह्मलोक पर्यन्त के नाशवान  
<a id="line-33"></a>सुख एवं पाँचों प्रकार की मुक्तियों की कामना नहीं करता। मैं तो  
<a id="line-34"></a>केवल निष्काम प्रेम ही चाहता हूँ। अपनी दासी की दासी की दासी  
<a id="line-35"></a>की दासी ही मुझे बना दीजिए। श्रीराधे! मुझे अपने निज महल की  
<a id="line-36"></a>सेवा प्रदान करना। ब्रज-रस का एक बिन्दु ही मुझे प्रदान करना।  
<a id="line-37"></a>तुम किसी गोपी से मुझे गोपी-प्रेम दिला देना। मैं तुम्हारा नाम  
<a id="line-38"></a>लेकर आँसू बहाया करूँ; मुझे ऐसा कब बनाओगी? निरन्तर तुम्हारा  
<a id="line-39"></a>ही गुण-गान करती रहूँ। तुम्हारी छवि को ही हृदय में धारण कर  
<a id="line-40"></a>लूँ। हे राधे! तुम अपनी रुचि में ही मेरी रुचि बना दो। मैं जिधर भी  
<a id="line-41"></a>दृष्टि डालूँ तुम्हें ही देखूँ। तुम्हारे बिना मेरा जीवन, जीवन न रहे।  
<a id="line-42"></a>हे बरसाना धाम में निवास करने वाली वृषभानुनन्दिनी! मैं अच्छा  
<a id="line-43"></a>हूँ अथवा बुरा हूँ, जैसा भी हूँ तुम्हारा ही तो हूँ। नासिका में नथ  
<a id="line-44"></a>एवं बुलाक धारण करने वाली ऊँचे महलों में रहने वाली राधे!

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-45"></a>एकमात्र तुम ही मेरी थी, हो एवं सदा रहोगी। मैं तुम्हें कभी न  
<a id="line-46"></a>भूलूँ और तुम भी मुझे कभी न भूलो। यद्यपि मैं जानता हूँ कि मैं  
<a id="line-47"></a>अत्यन्त बुरा हूँ किन्तु हूँ तो तुम्हारा ही। राधे! मेरी तो गति तुम  
<a id="line-48"></a>तक ही सीमित है। तुम ही मेरी बुद्धि को प्रेरित करने वाली हो  
<a id="line-49"></a>तथा तुम ही मुझे श्रीकृष्ण विषयक रति प्रदान करोगी। तुम्हें छोड़कर  
<a id="line-50"></a>यदि पतित-जनों के लिये कहीं अन्यत्र स्थान हो तो तुम्हीं बता  
<a id="line-51"></a>दो। जगत् में कुपुत्र तो देखे गये हैं किंतु माता तो कुमाता नहीं  
<a id="line-52"></a>होती। हे रसिक-शेखर के प्रेम-रंग में रंगी हुई, दिव्य-गुण-गणों  
<a id="line-53"></a>के कारण गर्वीली बनी हुई राधे! तुम ब्रजरस की वर्षा करने वाली  
<a id="line-54"></a>हो। तुम्हारी सेवा करने वाले सभी भक्त-जन तो अत्यन्त गुणवान  
<a id="line-55"></a>हैं। मुझ गुणहीन को भी उनके मध्य स्थान दे दो। राधे! यदि बुरे न  
<a id="line-56"></a>हों तो अच्छों का सम्मान कौन करेगा? हे “कृपालु” मुझसे बुरा  
<a id="line-57"></a>तुम्हें कहीं भी प्राप्त नहीं होगा।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

[Previous](https://radhey.shreyam1008.com.np/read/yugal-shatak-2005/yugal-shatak-2005-kirtan-076/) · [Next](https://radhey.shreyam1008.com.np/read/yugal-shatak-2005/yugal-shatak-2005-kirtan-078/)

[Book contents](https://radhey.shreyam1008.com.np/read/yugal-shatak-2005/) · [Source editions and protected PDF](https://radhey.shreyam1008.com.np/books/yugal-shatak/)

Unofficial source transcription. Roman transliteration is not an English translation. No missing meanings are generated.
