# मेरा तन मन धन प्राण तेरा राधे,

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-shatak-2005:yugal-shatak-2005-kirtan-073
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Book: Yugal Shatak
Source edition: 17-hi-2005; SHA-256 65e97712a464ad9a811875abe92d7ad166ef58f82c9b675cf4d010c1c940a7f7
Source PDF pages: 150–151



<a id="line-1"></a>मेरा तन मन धन प्राण तेरा राधे,  
<a id="line-2"></a>मेरा मैं भी नहिं पुनि कहु तोहिं का दे।  
<a id="line-3"></a>तेरा सुत होके मैं भिखारी बना राधे,  
<a id="line-4"></a>माता सर्व समरथ तभू ध्यान ना दे।  
<a id="line-5"></a>माना मैं कुपूत कपटी कुटिल राधे,  
<a id="line-6"></a>किन्तु पुनि जाऊँ कित तू ही बता दे।  
<a id="line-7"></a>मैं तो पतितन सिरमौर प्यारी राधे,  
<a id="line-8"></a>मेरे सम कोउ हो पतित तो बता दे।  
<a id="line-9"></a>तू तो है पतितपावनि रानी राधे,  
<a id="line-10"></a>कत मोय पावन किय न बता दे।  
<a id="line-11"></a>तेरे द्वार के भिखारी हरि हर राधे,  
<a id="line-12"></a>मेरी है बिसात कहा तू ही बता दे।  
<a id="line-13"></a>भीख माँगना भी मोहिं आवे नहिं राधे,  
<a id="line-14"></a>और कछु ना दे मोहिं माँगना सिखा दे।  
<a id="line-15"></a>जग सब साथी समरथ के हैं राधे,  
<a id="line-16"></a>तेरे बिनु दीनबंधु कौन है बता दे।  
<a id="line-17"></a>लख चौरासी द्वार माँग्यो भीख राधे,  
<a id="line-18"></a>तेरा द्वार जानूँ नहिं तू ही जना दे।  
<a id="line-19"></a>तेरे सब सुत तो हैं खरे खरे राधे,  
<a id="line-20"></a>मुझ खोटे को तो खरे संग चला दे।  
<a id="line-21"></a>तेरा द्वार तजि अब जाऊँ नहिं राधे,  
<a id="line-22"></a>चाहे तू “कृपालु” मो पै चक्र चला दे।।

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-23"></a>भावार्थ—भक्त कवि श्रीराधा के प्रति अपने भाव प्रकट करते  
<a id="line-24"></a>हुए कहते हैं-हे राधे! मेरा तन, मन, धन, प्राण (सर्वस्व) एकमात्र  
<a id="line-25"></a>तुम्हारा ही है। जब मेरा कहलाने वाला “मैं” भी अपना नहीं है, तब  
<a id="line-26"></a>भला मैं तुम्हें भेंट में क्या प्रदान करूँ? राधे तुम्हारा पुत्र होकर मैं  
<a id="line-27"></a>संसार में भीख माँग रहा हूँ। तुम मेरी सर्वसमर्थ माँ हो कर भी मेरी  
<a id="line-28"></a>दशा पर ध्यान नहीं देती हो। इसका कारण क्या है? राधे! मैं स्वीकार  
<a id="line-29"></a>करता हूँ कि मैं तुम्हारा कपटी एवं कुटिल कुपुत्र हूँ फिर भी मेरे  
<a id="line-30"></a>लिये तुम्हारे सिवा कोई अन्य आश्रय नहीं है। मैं किससे अपनी व्यथा  
<a id="line-31"></a>कहूँ? श्रीराधे! मैं भली-भाँति जानता हूँ कि मैं पतित-जनों का  
<a id="line-32"></a>शिरोमणि हूँ। मेरी समता करने वाला कोई दूसरा पापी हो तो, तुम  
<a id="line-33"></a>ही उसका नाम बता दो। हे पतितपावनी राधे! तुमने मुझे अभी तक  
<a id="line-34"></a>पवित्र क्यों नहीं किया? राधे! जब ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव तक तुम्हारे  
<a id="line-35"></a>द्वार पर याचना करते हैं, तब मैं यदि तुमसे कृपा की भिक्षा चाहूँ तो  
<a id="line-36"></a>इसमें आश्चर्य ही क्या है? मैं किस गणना में हूँ। हे राधे! मैं तो भीख  
<a id="line-37"></a>माँगना भी नहीं जानता अन्यथा अब तक तुम्हारी कृपा मुझे प्राप्त हो  
<a id="line-38"></a>गई होती; अतः अब तुम केवल मुझे भिक्षा माँगने की शिक्षा दो।  
<a id="line-39"></a>राधे! संसार में सभी समर्थ का साथ देते हैं। दीनों पर दया करने  
<a id="line-40"></a>वाली तो एकमात्र तुम ही हो। हे राधे! चौरासी लाख शरीर धारण  
<a id="line-41"></a>कर मैंने विभिन्न द्वारों पर तो भिक्षा माँगी परन्तु तुम्हारे द्वार से मैं  
<a id="line-42"></a>अपरिचित हूँ। तुम ही कृपा करके मुझे अपना द्वार दिखा दो। हे राधे!  
<a id="line-43"></a>तुम्हारे सभी पुत्र सर्वगुण सम्पन्न हैं। मुझ गुणहीन को भी उनमें ही  
<a id="line-44"></a>मिला लो। हे कृपालु राधे! मैंने भी प्रतिज्ञा कर ली है कि तुम्हारा  
<a id="line-45"></a>द्वार त्याग कर अन्यत्र नहीं जाऊँगा, भले ही तुम मुझ पर चक्र से  
<a id="line-46"></a>प्रहार करो।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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Unofficial source transcription. Roman transliteration is not an English translation. No missing meanings are generated.
