# अति भोरी भारी मेरी प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-ras-2005:yugal-ras-2005-kirtan-074
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Book: Yugal Ras
Source edition: 16-hi-2005; SHA-256 4bb470b1f96249e40eb21d96cd2bb6b8eec203f5ed370df4843197140ad5ea16
Source PDF pages: 152–154



<a id="line-1"></a>अति भोरी भारी मेरी प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-2"></a>विविध मणिन मंडित सिर प्यारी,  
<a id="line-3"></a>कनक मुकुट छवि न्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-4"></a>शीशफूल शोभा छवि न्यारी,  
<a id="line-5"></a>वेणी कुसुम सँवारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-6"></a>कजरारी अँखियन बिच प्यारी,  
<a id="line-7"></a>काजर रेखु सँवारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-8"></a>अति रसभरी बिलोकनि प्यारी,  
<a id="line-9"></a>लखि वारी बनवारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-10"></a>कानन कर्णफूल दुति प्यारी,  
<a id="line-11"></a>नथ मोतिन लर वारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

<a id="line-12"></a>बेसर झलकनि हलकनि प्यारी,  
<a id="line-13"></a>चूनरि जरिन किनारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-14"></a>मणि कंकण चूरिन छवि न्यारी,  
<a id="line-15"></a>मुँदरिन दुति अति प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-16"></a>वरद हस्त मुद्रा छवि न्यारी,  
<a id="line-17"></a>करतल मेहँदी प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-18"></a>गर हीरन हारन दुति प्यारी,  
<a id="line-19"></a>लर मोतिन छवि न्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-20"></a>नीली सारी कंचुकि प्यारी,  
<a id="line-21"></a>मणि किंकिणि छवि न्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-22"></a>पग पायल रुनझुन धुनि प्यारी,  
<a id="line-23"></a>जब चल गति मतवारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-24"></a>चरण मिहावरि अति अरुणारी  
<a id="line-25"></a>अँगुरिन बिछुवनि प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-26"></a>लखि “कृपालु” मम प्यारी प्यारी  
<a id="line-27"></a>मुर्छित गिर बनवारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-28"></a>भावार्थ—भक्त अपनी इष्टदेवी श्री राधा के प्रति अपने  
<a id="line-29"></a>हृदयोद्गार प्रकट करते हुए कहता है-मेरी प्यारी राधा अत्यन्त  
<a id="line-30"></a>ही भोली भाली हैं। श्री राधा के शीश पर अनेक प्रकार की  
<a id="line-31"></a>मणियों से जटित स्वर्ण मुकुट शोभा पा रहा है। शीशफूल नामक  
<a id="line-32"></a>आभूषण अनूठी छवि को प्राप्त हो रहा है। सखियों द्वारा सँवारी  
<a id="line-33"></a>हुई वेणी सुमन द्वारा गुम्फित है। सहज कजरारे नेत्रों में काजल

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-34"></a>की रेखा सँवारी गई है। श्री राधा के नेत्रों की रसपूर्ण चितवनि  
<a id="line-35"></a>को निहारकर प्रियतम कृष्ण स्वयं को निछावर करते हैं। श्री  
<a id="line-36"></a>राधा के कानों में कर्णफूल नामक आभूषण दमक रहे हैं। नासिका  
<a id="line-37"></a>में धारण की हुई नथ के मोतियों की लड़ को निरखकर सखियाँ  
<a id="line-38"></a>बलिहार जाती हैं। बेसर का हिल हिलकर झलमलाना बड़ा ही  
<a id="line-39"></a>भला प्रतीत होता है। जरी के किनारे की चुनरी की शोभा भी  
<a id="line-40"></a>न्यारी ही है। युग करों में मणियों से जड़े हुए कंकणों एवं  
<a id="line-41"></a>चूड़ियों की अनुपम छवि दर्शनीय है। उँगलियों में अँगूठियाँ  
<a id="line-42"></a>जगमगा रही हैं। श्री राधा के वरद हस्त-कमल की मुद्रा  
<a id="line-43"></a>अलौकिक करुणा को विकीर्ण कर रही है। कर-तल मेहँदी की  
<a id="line-44"></a>लालिमा से युक्त हैं। कम्बु-कण्ठ हीरों के हार की श्वेत आभा  
<a id="line-45"></a>से युक्त है। मोतियों के हार अपना प्रकाश प्रसारित कर रहे हैं।  
<a id="line-46"></a>नील वर्ण की साड़ी श्री राधा के गौर वर्ण पर अति सुन्दर लग  
<a id="line-47"></a>रही है। वक्ष कंचुकी से आवृत है। सूक्ष्म कटि प्रदेश पर मणियों  
<a id="line-48"></a>से जड़ी हुई किंकिणी शोभायमान है। चरणों में पायल की मधुर  
<a id="line-49"></a>रुनझुन ध्वनि हो रही है। चरणों में अरुण मिहावर छवि पा रहा  
<a id="line-50"></a>है। उंगलियों में बिछुवों की अद्भुत शोभा है।“कृपालु”कहते  
<a id="line-51"></a>हैं- सोलह शृंगार से युक्त मेरी स्वामिनी को निरखकर श्यामसुन्दर  
<a id="line-52"></a>मूर्च्छा को प्राप्त हो जाते हैं।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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Unofficial source transcription. Roman transliteration is not an English translation. No missing meanings are generated.
