# को कह सम पिय प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-ras-2005:yugal-ras-2005-kirtan-005
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Book: Yugal Ras
Source edition: 16-hi-2005; SHA-256 4bb470b1f96249e40eb21d96cd2bb6b8eec203f5ed370df4843197140ad5ea16
Source PDF pages: 22–24



<a id="line-1"></a>को कह सम पिय प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-2"></a>द्वै बापन वारो बनवारी,  
<a id="line-3"></a>भानुदुलारी प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-4"></a>कारो कारो तन बनवारी,  
<a id="line-5"></a>गोरी गोरी प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

<a id="line-6"></a>मोर मुकुट सिर धर बनवारी,  
<a id="line-7"></a>कनक मुकुट सिर प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-8"></a>गुंजमाल गर बिच बनवारी,  
<a id="line-9"></a>मोतिन लर गर प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-10"></a>कंध लकुटि नट तन बनवारी,  
<a id="line-11"></a>सब सिँगार तन प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-12"></a>कुलिश कठोर हृदय बनवारी,  
<a id="line-13"></a>अति कोमल उर प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-14"></a>अगनित प्यारी युत बनवारी,  
<a id="line-15"></a>पिय अनन्य व्रत प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-16"></a>चरण पलोटत नित बनवारी,  
<a id="line-17"></a>पलुटावति पग प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-18"></a>याचत भीख प्रेम बनवारी,  
<a id="line-19"></a>देति भीख तेहिं प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-20"></a>ब्रजवासिन तजि गये बनवारी,  
<a id="line-21"></a>नित्यवास ब्रज प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-22"></a>आराधक “कृपालु” बनवारी,  
<a id="line-23"></a>आराध्या मम प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-24"></a>भावार्थ—रसिक भक्त अपनी विलक्षण रीति से श्री  
<a id="line-25"></a>राधा की महत्ता प्रकाशित करते हैं- कौन कहता है-श्री कृष्ण  
<a id="line-26"></a>राधा के समान हैं? कहाँ तो दो पिता (वसुदेव एवं नंद) के पुत्र  
<a id="line-27"></a>कहलाने वाले कृष्ण एवं कहाँ भानु भूप के कुल में उत्पन्न हुई  
<a id="line-28"></a>राजकुमारी राधा, वनों में विचरण करने वाले कृष्ण का रंग तो  
<a id="line-29"></a>काला है, महलों में रहने वाली राधा अत्यन्त गौर वर्ण की हैं।

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-30"></a>कृष्ण तो वन में पड़े हुए मयूर पुच्छ को सिर पर धारण कर लेते  
<a id="line-31"></a>हैं परन्तु श्री राधा के शीश पर स्वर्ण मुकुट सुशोभित होता है।  
<a id="line-32"></a>कहाँ तो कृष्ण के कण्ठ में घुँघुची की माला और कहाँ भानुनन्दिनी  
<a id="line-33"></a>के गले का बहुमूल्य मुक्ताहार! नटवर कृष्ण के कंधे पर लकुटी  
<a id="line-34"></a>रखी है परन्तु श्री राधा तो सोलहों शृंगार से युक्त है। श्री कृष्ण  
<a id="line-35"></a>वज्र के समान कठोर हृदय के हैं किंतु श्री राधा का हृदय तो  
<a id="line-36"></a>अत्यन्त ही कोमल है। श्री कृष्ण बहुवल्लभ हैं। श्री राधा का  
<a id="line-37"></a>प्रेम अनन्य है वे केवल कृष्णव्रता ही हैं। कहाँ तो सुकुमारी  
<a id="line-38"></a>राधा के चरण दबाने वाले कृष्ण एवं कहाँ प्रियतम से चरण  
<a id="line-39"></a>दबवाने वाली अत्यन्त गौरवमयी राधा! दोनों समान कैसे हो  
<a id="line-40"></a>सकते हैं? श्री कृष्ण सदा श्री राधा के द्वार के प्रेम-भिक्षुक हैं।  
<a id="line-41"></a>श्री राधा उन्हें सदैव प्रेम-दान देती हैं। श्री कृष्ण निष्ठुर बनकर  
<a id="line-42"></a>ब्रज-वासियों को त्यागकर मथुरा एवं मथुरा से द्वारिका चले  
<a id="line-43"></a>गये परन्तु श्री राधा तो सर्वदा ब्रज में ही निवास करती हैं“कृपालु”  
<a id="line-44"></a>जी कहते हैं कि सबसे महत्वपूर्ण अन्तर तो दोनों में यह है कि  
<a id="line-45"></a>श्री राधा पूर्णब्रह्म श्रीकृष्ण की आराधिका हैं। अतः दोनों समान  
<a id="line-46"></a>नहीं हैं। श्री राधा का स्थान उच्च है।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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